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दहेज प्रथा भारत मे अभिसाप से कम नही है

भारत में दहेज प्रथा प्राचीन काल से ही प्रचलित है। भारतीय समाज मे दहेज प्रथा का चलन बहुत पुराना है।पहले ज्यादा राजा महाराजाओं में प्रचलन में था ।लेकिन अब ये हर समाज में है।पहले राजा महाराजा अपनी लड़कियों की शादियों में सोना, चांदी ,हीरे,जवारहत,हाथी, घोड़े,दासी,गांवों की रियासत दहेज में देते थे ।उस समय आम आदमी दहेज नही देता था।कोई गुप् चुप में ही चलन था। उस समय जो सक्षम था सेठ साहूकार या राज घराने में ही दहेज प्रथा थी ।अगर हार्य आदमी देता तो राजा उंनसे कर, लगान वसूलता इसी डर के कारण आम तौर पर ये प्रथा चलन में नही थी ।लेकिन जब से देश आजाद हुआ है।उसके बाद से ही आम आदमी भी दहेज लेने देने लगा है।इसी कारण से हर आदमी की कमर टूट गई है। आर्थिक दृष्टि से कमजोर हो रहा है।

दहेज कुप्रथा का अंत होना चाहिए

go अब भारतीय समाज मे दहेज प्रथा कैंसर रोग की तरह मल्टीप्लाई के हिसाब से बढ़ रही है।हर आम आदमी अपने लड़की की शादी में हर समान ,गाड़ी ,जेवरात, कपड़े नगदी देता है। चाहे उसके पास कुछ नही हो उसके बाद भी वो सब देने की कोशिस करता है।और कर्ज करके ये सब जुटाता है।अच्छा खाना, अच्छा डेकोरेशन करता है।हर मध्यम वर्ग का आदमी व गरीब इसमे ज्यादा पिसता है।देने के बाद भी वो अपनी लड़की को जिंदगी भर दहेज देता रहता है।कभी लड़की के बच्चे होने के नाम पर या लड़की के बच्चों की शादी में उसे देना ही पड़ता है। हर त्यौहार पर आने जाने पर हर बार कुछ न कुछ देने की परवर्ती भारत के समाज मे बानी हुई है।

ये प्रथा भारतीय समाज की कमर तोड़ रही है।

http://podzamcze-dobczyce.pl/index.php/restauracja/assets/js/layerslider.transitions.js भारतीय समाज मे इस दहेज प्रथा ने विकराल रूप धारण कर लिया है। जिसमे हर भारतीय आम नागरिक पिसता जा रहा है।जो आदमी दहेज के समान व शादी का खर्चा कर्ज़ करके दिया है ।उसकी जिंदगी नरक से बद्तर गुजरती है।उस रकम के सूद चुकाने में ही जिंदगी गुजर जाती है।उसके पूरे परिवार की जिंदगी खराब हो जाती है।न ही चैन से सो पाता है न ही खा पाता है।उस रकम के नही चुकने पर उसकी पूरी घर की शांति जीवन भर के लिए खत्म हो जाती है।आज के जमाने में एक गरीब से गरीब अपनी बच्ची की शादी काम से कम 6लाख से नीचे नही कर पाता है।उसके लिये अपनी जमीन व अपना मकान गिरवी रखकर शादी करता है।और वो अपनी जमीन व मकान जीवन भर नही छुटा पाता है।

जब तक प्रथा खत्म नही होगी भारत के नागरिकों का जीवन स्तर नही सुधरेगा

source link ईसी कारण उसकी जिंदगी उसके ब्याज चुकाने में ही निकल जाती है।भारतवाशी पाश्चात्य संस्कृति की नकल करता है। लेकिन कुरूतियों को छोड़ने की नकल नही करता है।जो समाज व हर आदमी के लिए अभिसाप से कम नही है।कोई भी दूसरे देश मे जो विकसित हैं उसमें कोई ऐसी प्रथा नही है। वो सिर्फ अपने धर्म के अनुसार अपनी शादी रचा लेते हैं।जो कि बहुत ही कम खर्चे में ही काम निपटा देते हैं। लेकिन भारत मे दहेज प्रथा की होड़ मची हुई है।एक दूसरे को देखकर ज्यादा ही ज्यादा बढ़ती जाती है।जिससे निजात पाने के लिए सरकार व समाज को कड़े कदम उठाने की जरूरत है। वरना हर आदमी की जिंदगी नरक बनती जाएगी ।

opcje binarne pewniaki दहेज प्रथा को जड़ से खत्म करना होगा ।

follow url दहेज की जगह अपनी बच्ची को काबिल बनाना चाहिए।

binäre optionen ea चाहे स्पोर्ट्स में या किसी व्यसाय में या किसी भी जॉब में आत्म निर्भर करना चाहिए।

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classifica broker opzioni digitali लड़की की जिंदगी ही बदल सकती है।

लड़का हो या लड़की आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत है।

तभी माता पिता व बच्चों की जिंदगी सफल होती है।

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