पहाड़ की नारी का हुंकार: उडियारी गांव में किसी भी कीमत पर नहीं खुलने देंगे शराब की दुकान।

हमे पानी चाहिए, शराब नहीं”—यह नारा आज पिथौरागढ़ के बेरीनाग स्थित उडियारी गांव की गूँज बन गया है। सरकार और प्रशासन की अजीबोगरीब कार्यप्रणाली से क्षुब्ध होकर गांव की सैकड़ों महिलाएं सड़कों पर उतर आई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पेयजल संकट के समाधान की मांग करने पर प्रशासन ने पहले उन पर मुकदमे लादे और अब ‘जख्मों पर नमक’ छिड़कते हुए गांव के बीचों-बीच शराब की दुकान खोलने की अनुमति दे दी है।

पानी पर मुकदमा, शराब पर स्वीकृति: ग्रामीणों में आक्रोश

उडियारी गांव के लोग पिछले काफी समय से गंभीर पेयजल किल्लत से जूझ रहे हैं।

  • पुरानी खुन्नस? ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने पानी की मांग को लेकर आवाज उठाई, तो प्रशासन ने सहानुभूति दिखाने के बजाय उन पर कानूनी कार्रवाई कर दी।

  • नया विवाद: अभी पुराने घाव भरे भी नहीं थे कि उडियारी बैंड क्षेत्र में शराब की दुकान खोलने की तैयारी शुरू हो गई। ग्राम प्रधान हेमा देवी के नेतृत्व में महिलाओं ने इसे गांव की शांति और संस्कृति पर हमला करार दिया है।

“किसी भी हाल में नहीं खुलेगा ठेका”

आक्रोशित महिलाओं ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है:

  1. चक्का जाम की चेतावनी: यदि शराब की दुकान खोलने का आदेश तुरंत निरस्त नहीं किया गया, तो उडियारी बैंड-बागेश्वर-थल मोटर मार्ग पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।

  2. जनप्रतिनिधियों का घेराव: महिलाएं अब उन नेताओं का घेराव करने की तैयारी में हैं जो चुनाव के समय पानी का वादा करते थे लेकिन अब शराब पर मौन हैं।

  3. स्वयं करेंगी ‘न्याय’: महिला मंगल दल अध्यक्ष ममता महरा ने कहा कि पुलिस और आबकारी विभाग अवैध शराब रोकने में नाकाम रहा है। अब महिलाएं खुद अवैध शराब बेचने वालों को पकड़ेंगी और उन्हें सजा देंगी।

प्रशासनिक विफलता पर उठे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि जिस गांव में पीने के पानी की लाइनें सूखी पड़ी हैं, वहां शराब की आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। प्रदर्शन में पार्वती देवी, मुन्नी देवी, विमला देवी और राजेंद्र महरा सहित दर्जनों ग्रामीणों ने भाग लिया।

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