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उत्तराखंड पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन (पिटकुल) के प्रबंध निदेशक को हटाने के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपना लिया है। कोर्ट के आदेश का पालन न करने पर ऊर्जा सचिव मीनाक्षी सुंदरम के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू कर दी गई है। अदालत ने इसे न्यायिक आदेशों की जानबूझकर की गई अनदेखी मानते हुए सचिव को 19 मार्च 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का फरमान सुनाया है।
क्या है पूरा विवाद?
मामला पिटकुल के प्रबंध निदेशक प्रकाश चंद्र ध्यानी की योग्यता और उनकी नियुक्ति से जुड़ा है:
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कोर्ट का आदेश: हाईकोर्ट ने पूर्व में सुनवाई करते हुए पिटकुल एमडी को पद से हटाने के निर्देश दिए थे। अदालत का मानना था कि उनकी नियुक्ति निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं है।
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पालन में देरी: सरकार की ओर से इस आदेश को लागू करने में की गई हीला-हवाली पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और ऊर्जा सचिव को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है।
‘जन प्रहार’ का हल्लाबोल: CAG जांच की मांग
एक तरफ कानूनी शिकंजा कस रहा है, तो दूसरी तरफ सामाजिक संगठनों का दबाव भी बढ़ रहा है। 24 फरवरी को सामाजिक संगठन ‘जन प्रहार’ के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव आनंद बर्धन से मुलाकात की:
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मांग: एमडी प्रकाश चंद्र ध्यानी को तत्काल बर्खास्त किया जाए और उनके पूरे कार्यकाल की CAG (कैग) जांच कराई जाए।
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चेतावनी: संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि शासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से उग्र आंदोलन शुरू करेंगे। मुख्य सचिव ने हालांकि उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
प्रशासनिक संकट: साख पर सवाल?
यह मामला इसलिए भी पेचीदा हो गया है क्योंकि हाल ही में धामी कैबिनेट ने एमडी पद की अर्हता (योग्यता) में संशोधन को मंजूरी दी थी। अब देखना यह होगा कि कोर्ट में 19 मार्च को सरकार इस ‘संशोधन’ और ‘अवमानना’ के बीच अपना बचाव कैसे करती है।