सिमली में 200 बेड के बेस अस्पताल की मांग पर भड़के ग्रामीण, गैरसैंण में विधायक अनिल नौटियाल के खिलाफ प्रदर्शन – India Mirror News

सिमली में 200 बेड के बेस अस्पताल की मांग पर भड़के ग्रामीण, गैरसैंण में विधायक अनिल नौटियाल के खिलाफ प्रदर्शन

उत्तराखंड के चमोली जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन तेज हो गया है। कर्णप्रयाग क्षेत्र के सिमली में स्वीकृत 200 बेड के बेस अस्पताल का निर्माण शुरू कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने गैरसैंण में विधानसभा सत्र के बाद लौट रहे जनप्रतिनिधियों के सामने विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय विधायक अनिल नौटियाल और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अस्पताल निर्माण में हो रही देरी पर नाराजगी जाहिर की।

ग्रामीणों की मांग है कि सिमली बेस अस्पताल का निर्माण जल्द शुरू किया जाए, ताकि पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों को गंभीर बीमारियों और आपातकालीन परिस्थितियों में बेहतर इलाज के लिए दूर के शहरों का रुख न करना पड़े। विधानसभा सत्र के बाद लौट रहे जनप्रतिनिधियों के सामने प्रदर्शन जानकारी के अनुसार, गैरसैंण में विधानसभा सत्र समाप्त होने के बाद जब मंत्री और विधायक वापस लौट रहे थे, उस दौरान धरनास्थल के आसपास मौजूद ग्रामीणों ने सड़क किनारे एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने विधायक अनिल नौटियाल और अन्य जनप्रतिनिधियों के वाहनों के गुजरने के दौरान नारेबाजी की और अपनी मांगों की ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया।

ग्रामीण हाथों में तख्तियां लेकर सिमली बेस अस्पताल का निर्माण शुरू कराने की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सरकार से स्वास्थ्य सुविधाओं के मुद्दे पर जवाब मांगा। मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक कर्मियों ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने मशक्कत के बाद वाहनों के काफिले को वहां से सुरक्षित निकलवाया। विधायक को ‘गुमशुदा’ बताकर जताया विरोध

आंदोलन के दौरान ग्रामीणों ने विधायक अनिल नौटियाल के नाम से एक पुतला भी लगाया, जिस पर ‘गुमशुदा विधायक’ लिखी तख्ती लगाई गई थी। इस प्रतीकात्मक प्रदर्शन के जरिए ग्रामीणों ने अपनी नाराजगी जाहिर की।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सिमली बेस अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण विषय पर लंबे समय से मांग उठाए जाने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। उनका कहना है कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का सीधा असर स्थानीय लोगों पर पड़ता है, इसलिए इस मुद्दे को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों से मांग की कि वे अस्पताल निर्माण की प्रगति स्पष्ट करें और काम शुरू कराने के लिए ठोस कदम उठाएं। विधायक और सरकार का इस विशेष प्रदर्शन पर क्या आधिकारिक पक्ष है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

चमोली से देहरादून तक पैदल यात्रा कर चुके हैं ग्रामीण

सिमली बेस अस्पताल की मांग को लेकर ग्रामीण पहले भी आंदोलन कर चुके हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने के लिए क्षेत्र के लोगों ने चमोली से देहरादून तक 200 किलोमीटर से अधिक की पैदल यात्रा की थी। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर अस्पताल निर्माण की मांग उठाई थी। ग्रामीणों का कहना है कि पहले किए गए प्रयासों और ज्ञापन के बावजूद उन्हें अब तक निर्माण कार्य शुरू होने का इंतजार है। इसी नाराजगी के चलते आंदोलन ने गैरसैंण में भी जोर पकड़ा है।

प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक अस्पताल निर्माण को लेकर धरातल पर कार्रवाई शुरू नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। सिमली में अस्पताल बनने से कई पहाड़ी क्षेत्रों को मिल सकता है लाभ सिमली में 200 बेड का बेस अस्पताल बनने से कर्णप्रयाग और आसपास के क्षेत्रों के साथ चमोली, रुद्रप्रयाग तथा पौड़ी जिलों के कई गांवों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है।

वर्तमान में पहाड़ी इलाकों के अनेक मरीजों को गंभीर बीमारी, दुर्घटना या आपातकालीन स्थिति में बेहतर इलाज के लिए श्रीनगर, ऋषिकेश और देहरादून जैसे शहरों तक जाना पड़ता है। लंबी दूरी और दुर्गम रास्तों के कारण मरीजों तथा उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि क्षेत्र में बड़े अस्पताल की सुविधा उपलब्ध होने से मरीजों को समय पर उपचार मिलने में मदद मिलेगी और दूरस्थ स्वास्थ्य केंद्रों पर निर्भरता भी कम हो सकती है।

सरकार के सामने ग्रामीणों की मांग पर कार्रवाई की चुनौती

सिमली बेस अस्पताल को लेकर जारी आंदोलन ने पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और विकास कार्यों की प्रगति पर एक बार फिर ध्यान खींचा है। ग्रामीण चाहते हैं कि अस्पताल निर्माण की स्थिति स्पष्ट की जाए और काम शुरू करने के लिए समयबद्ध कदम उठाए जाएं। अब इस मामले में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और संबंधित विभाग निर्माण कार्य की स्थिति पर क्या जानकारी देते हैं और ग्रामीणों की मांग पर आगे क्या कार्रवाई होती है। फिलहाल प्रदर्शनकारी अस्पताल निर्माण शुरू होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *