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बर्फबारी प्रभावित क्षेत्रों में अलग से होगी जनगणना, केंद्र ने दी जानकारी

उत्तराखंड समेत हिमालयी बर्फबारी वाले क्षेत्रों में जातीय जनगणना अगले साल एक अक्तूबर से शुरू होगी। हरिद्वार सांसद व पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत के लोकसभा में पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने ये जानकारी दी।

गृह राज्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने जनगणना-2027 को दो चरणों में आयोजित करने का निर्णय लिया है। उत्तराखंड के साथ ही हिमाचल, जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख के बर्फीले इलाकों में जनगणना का कार्य एक अक्तूबर से शुरू होगा। जनगणना दो चरणों में आयोजित होगी। पहले चरण में मकान सूचीकरण और मकानों की गणना होगी, जिसके तहत प्रत्येक परिवार की आवासीय स्थिति, संपत्ति और बुनियादी सुविधाओं से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी।

दूसरे चरण में जनगणना होगी, जिसके तहत प्रत्येक व्यक्ति की जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक तथा अन्य महत्वपूर्ण जानकारी ली जाएगी। विशेष रूप से, इस जनगणना में जाति आधारित गणना भी की जाएगी। नित्यानंद राय ने बताया कि सामान्य क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि एक मार्च 2027 की मध्यरात्रि होगी। हिमालयी बर्फबारी वाले क्षेत्रों (जैसे लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के असमय बर्फीले क्षेत्र) के लिए यह तिथि एक अक्तूबर की मध्यरात्रि निर्धारित की गई है।

विकास की बुनियादी योजना का आधार जनगणना
मंत्री ने बताया कि जनगणना-2027 के लिए वित्तीय परिव्यय को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसकी जानकारी समय पर साझा की जाएगी। राय ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को अद्यतन करने का कोई निर्णय फिलहाल नहीं लिया गया है। सरकार की ओर से केवल जनगणना कराने की अधिसूचना जारी की गई है। मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना की संचालन तिथियां उचित समय पर अधिसूचित की जाएंगी। सांसद त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं बल्कि विकास की बुनियादी योजना का आधार होती है।

सरकार की ओर से जाति आधारित आंकड़ों को शामिल करने और दो चरणों में जनगणना करने का निर्णय स्वागत योग्य है। इससे योजनाओं को और अधिक लक्षित रूप में क्रियान्वित किया जा सकेगा। यह जनगणना डिजिटल तकनीक और डेटा पारदर्शिता की दिशा में एक अहम कदम साबित होगी, जिससे विकसित भारत 2047 के विजन को गति मिलेगी।

 

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