विपक्ष के विरोध के कारण सदन में नहीं हो सकी अहम बहस – India Mirror News

विपक्ष के विरोध के कारण सदन में नहीं हो सकी अहम बहस

नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में हुए छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस की कथित कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम टिप्पणी की। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करता है। कोर्ट ने संकेत दिए कि यदि आवश्यक हुआ तो पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति का गठन भी किया जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून से ऊपर कोई नहीं है। यदि किसी भी अधिकारी या व्यक्ति ने अपनी कानूनी सीमा से बाहर जाकर कार्रवाई की है या कानून को अपने हाथ में लिया है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि जवाबदेही सुनिश्चित करना न्याय व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती से जुड़े आरोपों को केवल आरोप मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि हर आरोप की निष्पक्ष, स्वतंत्र और तथ्यों पर आधारित जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और जनता का न्याय व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि जांच का आदेश दिया जाता है तो पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक तरीके, उपलब्ध सबूतों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी। अदालत ने संकेत दिए कि जांच समिति की संरचना और उसमें शामिल किए जाने वाले विशेषज्ञों एवं अधिकारियों पर उचित समय पर निर्णय लिया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि पुलिस ज्यादती से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्षों से दिए गए सभी महत्वपूर्ण फैसलों और सिद्धांतों को एक जगह संकलित किया जाए। इससे भविष्य में ऐसे मामलों की जांच और सुनवाई के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध होंगे तथा कानून लागू करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही भी तय होगी। यह मामला नीट पेपर लीक के विरोध में देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा कथित बल प्रयोग और सख्ती से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को इस मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अदालत ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाते हैं तो स्वतंत्र जांच की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

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