हरिद्वार पुल निर्माण विवाद पर हाईकोर्ट का अहम फैसला, सभी पक्षों को सुनने के निर्देश – India Mirror News

हरिद्वार पुल निर्माण विवाद पर हाईकोर्ट का अहम फैसला, सभी पक्षों को सुनने के निर्देश

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नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बुधवार को दो अलग-अलग मामलों में महत्वपूर्ण फैसले सुनाए हैं। पहला मामला हरिद्वार जिले के रुड़की क्षेत्र में बिना भूमि अधिग्रहण और मुआवजा दिए पुल निर्माण से जुड़ा है, जबकि दूसरा मामला डोईवाला चीनी मिल के एक कर्मचारी को नियमित किए जाने से संबंधित है। दोनों मामलों में अदालत ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए संबंधित पक्षों को राहत प्रदान की है।

बिना भूमि अधिग्रहण पुल निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त

हरिद्वार जिले की रुड़की तहसील के ग्राम मलकपुर और लतिफपुर के निवासियों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट की एकलपीठ ने जिलाधिकारी हरिद्वार को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ताओं द्वारा 31 मई 2026 को दिए गए प्रत्यावेदन का कानून के अनुसार निस्तारण किया जाए। वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने आदेश दिया कि कोर्ट के आदेश की प्रति प्राप्त होने के बाद 9 माह के भीतर संबंधित मामले का निर्णय लिया जाए। साथ ही प्रशासन को यह भी निर्देश दिया गया कि निर्णय लेने से पहले सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाए।

क्या है पूरा विवाद?

याचिकाकर्ता संजीव कुमार और अन्य ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी निजी भूमि पर बिना भूमि अधिग्रहण और बिना किसी मुआवजे के पुल का निर्माण किया जा रहा है। उनका कहना है कि संबंधित भूमि उनके नाम दर्ज है और उस पर निर्माण करना कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि वर्ष 1975 में इसी क्षेत्र में बने एक अन्य पुल के निर्माण के दौरान उनकी भूमि का विधिवत अधिग्रहण कर मुआवजा दिया गया था, लेकिन इस बार प्रशासन ने न तो भूमि अधिग्रहित की और न ही कोई मुआवजा दिया। कई बार प्रशासन और राज्य सरकार को ज्ञापन देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होने पर उन्हें हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। वहीं राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि नया पुल पुराने स्थान से अलग जगह बनाया जा रहा है, इसलिए भूमि अधिग्रहण या मुआवजा देने की आवश्यकता नहीं है।

डोईवाला चीनी मिल कर्मचारी को मिली बड़ी राहत

दूसरे महत्वपूर्ण मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने डोईवाला चीनी मिल प्रबंधन की विशेष अपील खारिज करते हुए एक कर्मचारी को नियमित करने के एकलपीठ के आदेश को बरकरार रखा है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने कहा कि एकलपीठ का आदेश पूरी तरह वैध है और उसमें किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि नहीं है। इसलिए चीनी मिल प्रबंधन द्वारा दायर विशेष अपील स्वीकार करने का कोई आधार नहीं बनता।

30 वर्षों से नियमितीकरण का इंतजार

सुनवाई के दौरान चीनी मिल प्रबंधन ने दलील दी कि संबंधित कर्मचारी ने वर्ष 2013 में स्वयं सहायक के पद से ऑयलमैन का सीजनल पद चुना था, इसलिए उसे नियमित नहीं किया जा सकता। वहीं कर्मचारी की ओर से बताया गया कि उसकी नियुक्ति 1993 में हुई थी और वह तीन दशक से अधिक समय से सेवा दे रहा है। कर्मचारी ने यह भी कहा कि उससे पहले इसी पद पर कार्यरत कर्मचारियों को नियमित किया जा चुका है, इसलिए समानता के आधार पर उसे भी नियमित किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एकलपीठ के आदेश को सही ठहराते हुए चीनी मिल प्रबंधन की अपील खारिज कर दी। इन दोनों फैसलों को उत्तराखंड में भूमि अधिकारों और कर्मचारियों के सेवा अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय माना जा रहा है।


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